कैलकुलेटर
दैनिक चौघड़िया
सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक आठ दिन और आठ रात के खंड — महत्वपूर्ण कार्य से पहले अपने शहर की शुभ चौघड़िया चुनें। जन्म कुंडली की ज़रूरत नहीं।
आज
सोमवार, 10 अगस्त 2026
अभी समाप्त
चल
19:05 – 20:25
सामान्यअभी चल रहा
रोग
20:25 – 21:45
बचेंअगला
काल
21:45 – 23:06
बचेंसूर्योदय
05:47
सूर्यास्त
19:05
अभिजित मुहूर्त
11:59 → 12:52
राहु काल
07:27 → 09:06
दिन की चौघड़िया
8 · 1घं 40मि
अमृत
अमृत — सर्वोत्तम खंड। किसी भी महत्वपूर्ण कार्य के लिए उत्तम।
05:47 – 07:27
काल
काल — सबसे अशुभ खंड। सभी महत्वपूर्ण कार्यों से बचें।
07:27 – 09:06
शुभ
शुभ — नए आरंभ, संस्कार और अध्ययन के लिए अनुकूल।
09:06 – 10:46
रोग
रोग — महत्वपूर्ण कार्य से बचें, विशेषकर स्वास्थ्य संबंधी।
10:46 – 12:26
उद्वेग
उद्वेग — तनावपूर्ण खंड। महत्वपूर्ण कार्य से बचें।
12:26 – 14:06
चल
चल — सामान्य; यात्रा और नियमित कार्यों के लिए ठीक।
14:06 – 15:45
लाभ
लाभ — व्यापार, लेन-देन और धन संबंधी कार्यों के लिए अनुकूल।
15:45 – 17:25
अमृत
अमृत — सर्वोत्तम खंड। किसी भी महत्वपूर्ण कार्य के लिए उत्तम।
17:25 – 19:05
रात की चौघड़िया
8 · 1घं 20मि
चल
चल — सामान्य; यात्रा और नियमित कार्यों के लिए ठीक।
19:05 – 20:25
रोग
अभीरोग — महत्वपूर्ण कार्य से बचें, विशेषकर स्वास्थ्य संबंधी।
20:25 – 21:45
काल
काल — सबसे अशुभ खंड। सभी महत्वपूर्ण कार्यों से बचें।
21:45 – 23:06
लाभ
लाभ — व्यापार, लेन-देन और धन संबंधी कार्यों के लिए अनुकूल।
23:06 – 00:26
उद्वेग
उद्वेग — तनावपूर्ण खंड। महत्वपूर्ण कार्य से बचें।
00:26 – 01:47
शुभ
शुभ — नए आरंभ, संस्कार और अध्ययन के लिए अनुकूल।
01:47 – 03:07
अमृत
अमृत — सर्वोत्तम खंड। किसी भी महत्वपूर्ण कार्य के लिए उत्तम।
03:07 – 04:27
चल
चल — सामान्य; यात्रा और नियमित कार्यों के लिए ठीक।
04:27 – 05:48
समय चुने शहर के सूर्योदय–सूर्यास्त पर आधारित हैं। जन्म कुंडली की ज़रूरत नहीं।
अगले 7 दिनों की चौघड़िया
हरे खंड शुभ, लाल अशुभ — समय चुने शहर के अनुसार।
दिन
| तिथि | 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 | 8 |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सोम, 10/8 | अमृत05:47 | काल07:27 | शुभ09:06 | रोग10:46 | उद्वेग12:26 | चल14:06 | लाभ15:45 | अमृत17:25 |
| मंगल, 11/8 | रोग05:48 | उद्वेग07:27 | चल09:07 | लाभ10:46 | अमृत12:26 | काल14:05 | शुभ15:45 | रोग17:24 |
| बुध, 12/8 | लाभ05:48 | अमृत07:28 | काल09:07 | शुभ10:46 | रोग12:26 | उद्वेग14:05 | चल15:44 | लाभ17:24 |
| गुरु, 13/8 | शुभ05:49 | रोग07:28 | उद्वेग09:07 | चल10:46 | लाभ12:25 | अमृत14:05 | काल15:44 | शुभ17:23 |
| शुक्र, 14/8 | चल05:49 | लाभ07:28 | अमृत09:07 | काल10:46 | शुभ12:25 | रोग14:04 | उद्वेग15:43 | चल17:22 |
| शनि, 15/8 | काल05:50 | शुभ07:29 | रोग09:07 | उद्वेग10:46 | चल12:25 | लाभ14:04 | अमृत15:43 | काल17:21 |
| रवि, 16/8 | उद्वेग05:50 | चल07:29 | लाभ09:08 | अमृत10:46 | काल12:25 | शुभ14:03 | रोग15:42 | उद्वेग17:21 |
रात
| तिथि | 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 | 8 |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सोम, 10/8 | चल19:05 | रोग20:25 | काल21:45 | लाभ23:06 | उद्वेग00:26 | शुभ01:47 | अमृत03:07 | चल04:27 |
| मंगल, 11/8 | लाभ19:04 | उद्वेग20:24 | शुभ21:45 | अमृत23:05 | चल00:26 | रोग01:47 | काल03:07 | लाभ04:28 |
| बुध, 12/8 | उद्वेग19:03 | शुभ20:24 | अमृत21:44 | चल23:05 | रोग00:26 | काल01:47 | लाभ03:07 | उद्वेग04:28 |
| गुरु, 13/8 | अमृत19:02 | चल20:23 | रोग21:44 | काल23:05 | लाभ00:26 | उद्वेग01:47 | शुभ03:07 | अमृत04:28 |
| शुक्र, 14/8 | रोग19:01 | काल20:22 | लाभ21:43 | उद्वेग23:04 | शुभ00:25 | अमृत01:47 | चल03:08 | रोग04:29 |
| शनि, 15/8 | काल19:00 | लाभ20:21 | उद्वेग21:43 | शुभ23:04 | अमृत00:25 | चल01:47 | रोग03:08 | काल04:29 |
| रवि, 16/8 | शुभ18:59 | अमृत20:21 | चल21:42 | रोग23:04 | काल00:25 | लाभ01:47 | उद्वेग03:08 | शुभ04:29 |
चौघड़िया क्या है?
चौघड़िया पश्चिमी भारत की लोकप्रिय मुहूर्त पद्धति है। सूर्योदय से सूर्यास्त तक के दिन को आठ समान भागों में, और सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक की रात को आठ भागों में बाँटा जाता है। प्रत्येक खंड का स्वामी एक ग्रह होता है और उसकी गुणवत्ता निश्चित रहती है — शुभ, सामान्य या कठोर — ताकि रोज़मर्रा के काम के लिए समय जल्दी चुना जा सके।
सात नाम और उनका अर्थ
अमृत, शुभ और लाभ शुभ हैं — नए कार्य, संस्कार, अध्ययन और व्यापार के लिए। चल सामान्य है — यात्रा या नियमित काम के लिए ठीक। उद्वेग, रोग और काल से महत्वपूर्ण कार्यों में बचें। अच्छा चौघड़िया खंड भी राहु काल से टकराए तो आमतौर पर छोड़ दिया जाता है।
- 1अमृत / शुभ / लाभ — टिकाऊ आरंभ के लिए चुनें।
- 2चल — यात्रा और सामान्य आवागमन।
- 3उद्वेग / रोग / काल — जहाँ संभव हो, इन्हें टालें।
समय कैसे निकाले जाते हैं
खंड केवल स्थानीय सूर्योदय, सूर्यास्त और वार से बनते हैं — जन्म कुंडली से नहीं। दिन का पहला खंड वार-स्वामी पर निर्भर करता है; फिर सात नाम निश्चित क्रम में आठ स्थान भरते हैं। सूर्योदय शहर और ऋतु से बदलता है, इसलिए स्थान या तिथि बदलते ही घड़ी का समय बदल जाता है।
दिन बनाम रात चौघड़िया
दिन की चौघड़िया सूर्योदय से सूर्यास्त तक चलती है; रात की सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक। दोनों में आठ खंड होते हैं, पर आरंभ भिन्न होता है — इसलिए गुणवत्ता और समय दिन-रात अलग पढ़े जाते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
चौघड़िया रोज़मर्रा का त्वरित संकेत है, विवाह या बड़े संस्कारों का पूर्ण मुहूर्त नहीं। बड़े अवसरों पर योग्य ज्योतिषी से परामर्श लें।
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यह विवरण स्पष्ट आरंभिक मानचित्र है। रत्न या मंत्र उपाय, विवाह मिलान, कार्यक्षेत्र का समय और व्यक्तिगत मार्गदर्शन के लिए संदेश या कॉल करें।